बैनगंगा नदी का 9 सौ फुट चुनरी से किया श्रृंगार
जबलपुर। गंगा दशहरा के पावन पर्व पर आज पुण्य सलिला मां नर्मदा के विभिन्न तटों पर स्नान करने वालों का मेला लगेगा और नर्मदा तटों पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा।
गंगा दशहरे का भले ही गंगा के तटों में मुख्य रुप से बनाया जाता है लेकिन नर्मदा तट पर भी पूरी श्रद्धा के साथ गंगा दशहरे का पर्व मनाया जाने लगा है। इस दिन श्रद्धालु मॉ नर्मदा में गंगा जल अर्पण कर मॉ गंगा का आव्हान करते हैं और स्नान ध्यान कर मां नर्मदा का पूजन अर्चन करते हैं इस बात का पुराणों में भी उल्लेख है कि पुण्य सलिला गंगा के स्नान से जो पुण्य मिलता है वही पुण्य मां नर्मदा के दर्शन मात्र से भी प्राप्त होता है।
9 सौ फुट की चुनरी से बैनगंगा का श्रृंगार
प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी भेड़ाघाट बैनगंगा नदी में गंगा दशहरा की पूर्व सुबह पर शाम 4 बजे 900 फुट की चुनरी से मां गंगा का श्रृंगार किया गया। यह कार्यक्रम इस पार हरे कृष्णा आश्रम से उस पार बैनगंगा के नये पुल तक चुनरी चढ़ाई गई। पुराणों के अनुसार नर्मदा बैनगंगा, सरस्वती के संगम पर यह आयोजन होता है। इस अवसर पर बैनगंगा का दुग्ध अभिषेक के साथ महाआरती की गई। इस अवसर पर आश्रम के संस्थापक स्वामी रामचन्द्रदास महाराज ने बताया कि वाणासुर नाम का राक्षस प्रतिदिन करोंड़ों शिवलिंग का निर्माण करता था। वह सभी शिवलिंगों को गंगा में प्रवाहित करना चाहता था तब भगवान शिव ने दर्शन देकर कहा जहां तुम जमीन में बाण मारोगे वहीं से गंगा जी प्रकट होगी और यह गंगा तुम्हारे नाम के पीछे रहेगी तभी से गंगा मैया लोगों के पाप धोते धोते थक गयी तब मां नर्मदा जी ने गंगा को आर्शीवाद दिया कि तुम साल में एक बार हमसे मिलकर पूरे पाप धो सकती हो और तभी से साल में एक बार गंगा दशहरा पर गंगा मैया नर्मदा से मिलने आती है। इस अवसर पर आश्रम के संस्थापक स्वामी रामचंद्र दास, नर्मदा महाआरती के संस्थापक डॉ सुधीर अग्रवाल जय किशन गुप्ता, शरद अग्रवाल, सचिन अग्रवाल, सुषमाशंकर पटेल मनमोहन दुबे श्याम मनोहर पटेल विनोद दीवान मनोज गुलाबवानी कैलाश विश्वकर्मा सुरेश विश्वकर्मा विशाल पांड्या आदि उपस्थित रहे|








