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तेल ने 4 गुना कर दी गुयाना के लोगों की कमाई, वैसा ही भंडार अब भारत के अंडमान में मिलने की उम्मीद : पेट्रोलियम मंत्री पुरी ने बताया- 6 गुना बढ़ जाएगी अर्थव्यवस्थाभारतीय व्यंजन

पुरी ने कहा- भारत गयाना-स्तर की खोज के मुहाने पर
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी ईरान‑इज़राइल तनाव से कच्चे तेल का बाजार सिहर उठा है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि हालात बिगड़े तो ब्रेंट क्रूड 150 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकता है। इसी पृष्ठभूमि में भारत के लिए उत्साहजनक खबर आई है, जिसके मुताबिक अंडमान सागर में विशाल कच्चे तेल भंडार के संकेत मिले हैं। यदि इसकी पुष्टि हो जाती है तो भारत की आयात निर्भरता घट जाएगी।
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक बातचीत में इस आशय का दावा किया है। मंत्री पुरी ने कहा, कि भारत गयाना‑स्तर की खोज के मुहाने पर खड़ा है। दरअसल गयाना के स्टैब्रोक ब्लॉक में अमेरिकी हेस कॉरपोरेशन और चीनी सीएनओओसी ने अब तक 11.6 अरब बैरल के अनुमानित भंडार की खोज की है, जिसने उस छोटे दक्षिण अमेरिकी देश को वैश्विक ऊर्जा‑नक्शे पर चमका दिया।
तेल आयात में आएगी भारी कमी: फिलहाल भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 फ़ीसदी तेल आयात करता है और आयातक देशों में अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर है। अंडमान में वाणिज्यिक रूप से व्यवहार्य रिज़र्व मिलने पर यह निर्भरता तेज़ी से घट सकती है।
अर्थव्यवस्था को बूस्टर : पुरी के अनुसार, खोज सफल होती है तो 3.7 ट्रिलियन डॉलर की भारतीय अर्थव्यवस्था दो दशक के अंदर में ही 20 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा छू सकती है। ऊर्जा सुरक्षा से विनिर्माण‑वित्तीय सेवाओं तक व्यापक असर पड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पर्याप्त तेल उत्पादन होने पर भारत खुद तेल निर्यातक क्लब में शामिल हो सकता है, जिससे चालू खाते का घाटा सिमटने और रुपये को बल मिलने की संभावना है।
आगे की राह
सरकारी अन्वेषण कंपनी ओएनजीसी और डीजीएच (हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय) के भूकंपीय सर्वे और अन्वेषण मंच सागर सम्राट पर पहले दौर की ड्रिलिंग की जा रही है। मौजूदा वक्त तक मिले डेटा ‘उत्साहजनक’ बताये गए हैं, पर भंडार का सटीक प्रमाण और गुणवत्ता का आकलन ‘अप्प्रैज़ल वेल’ पूरा होने के बाद ही होगा। यदि परिणाम सकारात्मक रहे तो 2027‑28 तक विस्तृत विकास‑योजना (एफडीपी) तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
बावजूद इसके विश्लेषकों का कहना है, कि आशाजनक संकेत के बाद भी तेल का घरेलू उत्पादन कई साल दूर लगता है, इस बीच भू‑राजनीतिक उतार‑चढ़ाव भारत की ऊर्जा लागत तय करते रहेंगे। यही कारण है कि केंद्र समानांतर रूप से हरित‑ऊर्जा और सामरिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) विस्तार को भी आगे बढ़ा रही है।
Deepu Choubey

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