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गांवों में रहने वालों को भी देना होगा टैक्स

पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने की कवायद
भोपाल। नगरीय निकायों की तरह अब गांवों में रहने वाले लोगों को भी विभिन्न प्रकार के टैक्स देने पड़ेंगे। यह पंचायतों को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने की कवायद का हिस्सा है। दरअसल, सरकार का फोकस इस बात पर हैं कि प्रदेश के गांवों को भी शहरों की तरह सर्वसुविधायुक्त बनाया जाए। गांवों में अच्छी सडक़ें, अच्छे स्कूल, पीने के शुद्ध पानी, स्वच्छता आदि पर फोकस किया जा रहा है। इन सारी व्यवस्थाओं के लिए भोपाल जिले में नगर निगम की दर्ज पर 222 ग्राम पंचायतों में इस साल चार प्रमुख कर अधिरोपित किए गए हैं। जल्दी ही इसकी वसूली शुरू होगी। अभी तक ऐसे कर नगरीय निकायों में थे। पंचायत में करों का जो स्लैब है वह है संपत्ति कर- 200 रुपये वार्षिक प्रति एक लाख रुपये मूल्य की संपत्ति पर। व्यावसायिक कर1400 रुपये वार्षिक, जल कर 60 से 100 रुपये प्रतिमाह और स्वच्छता कर 50 रुपये प्रतिमाह। गौरतलब है कि करीब 3 साल पहले पंचायत में संपत्ति जल और स्वच्छता कर लेने की शुरुआत की गई थी लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले टैक्स कलेक्शन पर रोक लगा दी गई थी। उसे समय तक 222 पंचायत से करीब ढाई करोड़ रुपए कर के रूप में वसूल किए गए थे। एक बार फिर से यह वसूली जिले में शुरू करवा दी गई है। जिले में जब योजना शुरू की गई थी उसे समय 187 ग्राम पंचायती थी वर्तमान में यह बढक़र 222 पहुंच गई है इनमें 614 गांव आते हैं। प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग दीपाली रस्तोगी का कहना है कि नियम तो हैं पर अभी स्वकराधान के मामले में पंचायतें पीछे हैं। सबको प्रेरित किया जा रहा है कि वे न केवल टैक्स लगाएं बल्कि लोगों को इसे चुकाने के लिए जागरूक भी करें ताकि इसका उपयोग विकास कार्यों में किया जा सके।
महिलाओं के हाथ में कर वसूली
भोपाल ने वर्ष 2022 में पहली बार प्रायोगिक तौर पर पंचायतों में कर प्रणाली शुरू की थी। मार्च 2023 तक जिले की पंचायतों में जल कर, स्वच्छता कर और संपत्ति कर वसूल भी किया। तब एक साल में कुल तीन करोड़ 17 लाख 53,673 रुपये की वसूली हुई थी। बाद में इसे बंद कर दिया गया। बताया गया कि त्रिस्तरीय पंचायत और विधानसभा चुनाव को लेकर जनप्रतिनिधियों के दबाव में इसे बंद करना पड़ा। चुनाव के बाद इसके बकाए हिस्से की वसूली फिर से की गई। अब नए सिरे से कर निर्धारण कर वसूली प्रक्रिया स्थायी तौर पर शुरू की जा रही है। इसमें पहली बार व्यावसायिक गतिविधियों पर कर लगाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि पंचायतों के पास इसकर से अपनी निधियां तैयार होंगी। इसका उपयोग स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों के संचालन मेंहो सकेगा। खुद का फंड नहीं होने के कारण पंचायतें विकास कार्यों के लिए दूसरी निधियों के भरोसे रहती हैं। 222 ग्राम पंचायतों में सभी तरह की कर वसूली का जिम्मा 444 कर सखियों के हाथों में सौंपा गया था। इन सखियों को कर वसूली करने से पहले प्रशिक्षण दिया गया था और हर पंचायत में दो-दो सखियां इस काम में लगाई गईं थी।
पंचायत राज अधिनियम में कराधान का प्रविधान
प्रदेश में पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पंचायत राज अधिनियम में ही स्वकराधान का प्रविधान किया गया है। वर्ष 2022 में इसकी दरें पुनरीक्षित की गईं। प्रदेश की 23 हजार 11 ग्राम पंचायतों में से लगभग 18 हजार पंचायतें तो ऐसी हैं जो टैक्स नहीं वसूल रही हैं। केवल शहरों या कस्बों से सटी पंचायतों में ही। में ही टैक्स वसूला जा रहा है। यह भी वर्ष भर में साढ़े चार करोड़ रुपये के आसपास ही है। इसमें से भोपाल में अकेले तीन करोड़ की वसूली है। सीईओ जिला पंचायत भोपाल इला तिवारी का कहना है कि जिले की सभी 222 ग्राम पंचायतों में जल, स्वच्छता, संपत्ति, व्यावसायिक कर सहित अन्य करों की वसूली का काम शुरू किया जाएगा। इसके लिए महिला स्वसहायता समूह की 444 टैक्स सखियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
विकास कार्य में खर्च होगी यह राशि
विकास कार्यों के लिए खुद का फंड नहीं होने के कारण पंचायतें विकास कार्यों के लिए दूसरी निधियां के भरोसे रहती हैं। ऐसे में पंचायत को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और विकास कार्यों को गति देने के लिए पंचायत में टैक्स कलेक्शन की शुरुआत हुई थी। इसके पीछे सोच यह थी कि गांव में प्रॉपर्टी टैक्स का कलेक्शन होने से पंचायत का खुद का फंड होगा। इससे वह विकास के काम कर सकेंगी।
Deepu Choubey

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