सीएमएचओ के विरुद्ध 45 दिन के भीतर जांच न करने का मामला
हाई कोर्ट ने लोकायुक्त को जारी किए अवमानना नोटिस जबलपुर। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति द्वारिकाधीश बंसल की एकलपीठ ने लोकायुक्त सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सत्येंद्र कुमार सिंह को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया है। मामला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जबलपुर के विरुद्ध 45 दिन के भीतर आरोपों की जांच न किए जाने के रवैये को चुनौती से संबंधित है। मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त िाको नियत की गई है।
अवमानना याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी नरेंद्र कुमार राकेशिया की ओर से अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि सीएमएचओ डा. संजय मिश्रा के विरुद्ध भ्रष्टाचार, सेवा नियमों के उल्लंघन व कदाचरण के आरोपों सहित पूर्व में याचिका दायर की गई थी। जिस पर सुनवाई के बाद इस निर्देश के साथ पटाक्षेप किया गया था कि लोकायुक्त 45 दिन की समय-सीमा के भीतर जांच सुनिश्चित करें। लेकिन समयावधि निकलने के बावजूद हाई कोर्ट के 28 अप्रैल, 2025 के आदेश का परिपालन नहीं किया गया। लिहाजा, अवमानना याचिका दायर की गई है।दरअसल, हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद न तो जांच प्रारंभ हुई और न ही याचिकाकर्ता को किसी प्रकार की सूचना दी गई। इस रवैये को लेकर याचिकाकर्ता ने 12 जून, 2025 को लोकायुक्त कार्यालय को न्यायालयीन आदेश के पालन हेतु आवेदन भी प्रस्तुत किया था। इसके बावजूद लोकायुक्त न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप शिकायत पर कोई कार्रवाई करने में विफल रहे और मामले पर चुप्पी साधे रहे।
हाई कोर्ट के आदेश का पालन न होने से आहत होकर याचिकाकर्ता ने अवमानना याचिका दायर की, जिसमें स्पष्ट रूप से न्यायालय के आदेश की जानबूझकर अवहेलना किए जाने का मामला प्रस्तुत किया गया। याचिकाकर्ता द्वारा 28 अप्रैल के आदेश की जानबूझकर अवज्ञा करने के लिए न केवल लोकायुक्त मप्र के विरूद्ध अवमानना कार्यवाही शुरू कर लोकायुक्त को दंडित करने की मांग की बल्कि यह मांग भी की गई कि न्यायालय के पूर्ववर्ती आदेश का पालन करने के लिए भी अवमाननाकर्ता को निर्देश दिए जाएं। अवमानना याचिकाकर्ता द्वारा लोकायुक्त मप्र को की गई शिकायत में सीएमएचओ डा. मिश्रा पर आरोप लगाया गया था कि सरकार द्वारा प्रशासनिक कार्य करने वाले चिकित्सकों पर प्राइवेट प्रैक्टिस की पाबंदी लगाए जाने के बावजूद उनके द्वारा सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना परफेक्ट एंडोकेयर लेव, एप्पल पैथोलाजी सेंटर व फेथ पैथेलाजी अवैध रूप से चलाई गई। यह भी आरोप था कि पैथोलाजी लेब के अवैध संचालन से मिला पैसा डा. मिश्रा द्वारा न केवल अपनी दूसरी पत्नी इप्शिता सिंह मिश्रा के नाम पर फ्लैट खरीदने में खर्च किया गया बल्कि फ्लैट खरीदने के लिए सरकार से पूर्व मंजूरी भी नहीं ली।