न्यूज लाइफ / जबलपुर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने राशन दुकान विक्रेताओं द्वारा प्रस्तुत याचिका की सुनवाई करते हुये विक्रेताओं को बड़ी राहत प्रदान की है माननीय उच्च न्यायालय ने कलेक्टर जबलपुर को निर्देश दिये है कि वे विक्रेताओं के लंबित अभ्यावेदन का 30 दिन में निराकरण करें एवं उचित आदेश पारित करें एवं याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन के अनुसरण में किसी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई भी प्रदान की जाये, याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन पर निर्णय होने तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई उत्पीड़नात्मक कार्यवाही नही की जाये ।
यह मामला प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति पड़वार के अंतर्गत संचालित राशन दुकान विक्रेता ईश्वरी प्रसाद यादव, ब्रजकिशोर उपाध्याय ऋषि यादव, नन्दकिशोर उपाध्याय की ओर से दायर किया गया था, जिसमें बताया गया कि कोरोना सत्र के दौरान पी.ओ.एस मशीनों के उपयोग में छूट दी गई थी और कोरोना काल में किसी भी विक्रेता ने पी.ओ.एस. मशीनों का उपयोग नहीं किया था जिसका स्टॉक मशीनों में वर्तमान में दर्ज है जो सही नहीं हुआ है, याचिकाकर्ताओं के द्वारा कलेक्टर जबलपुर द्वारा जारी आदेश के तहत स्टॉक के सुधार के लिए आवेदन प्रस्तुत किया है जो लंबित है और उस पर अभी तक कोई आदेश पारित नहीं किया गया है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुघोष भमोरे, निशांत मिश्रा ने पक्ष रखा, उन्होंने कोर्ट को बताया कि कोरोना काल के दौरान पी.ओ.एस. मशीनों के उपयोग में छूट दी गई थी और कोरोना काल में किसी भी विक्रेता ने पी.ओ.एस. मशीनों का उपयोग नहीं किया था जिसका स्टॉक मशीनों में वर्तमान में दर्ज है जो सही नहीं हुआ है एवं पी.ओ.एस. मशीनों के स्टॉक में सुधार न होने से विक्रेताओं के विरुद्ध कार्यवाहियां की जा रही जबकि विक्रेताओं द्वारा कोरोना काल में किये गये खाद्यान्न वितरण के संबंध में समस्त प्रमाण एवं साक्ष्य मौजूद है मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने निर्णय पारित करते हुए कलेक्टर जबलपुर को निर्देश दिये है कि वे विक्रेताओं के लंबित अभ्यावेदन का 30 दिन में निराकरण करें एवं उचित आदेश पारित करें एवं याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन के अनुसरण में किसी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई भी प्रदान की जाये, याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन पर निर्णय होने तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई उत्पीडनात्मक कार्यवाही नही की जाये याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुघोष भमोरे, निशांत मिश्रा ने पक्ष रखा ।








