6 तथ्यात्मक बिन्दुओं पर पुलिस अधीक्षक अमित कुमार को प्रेस परिषद करेली के अध्यक्ष अनुज ममार ने परिषद के वरिष्ठ व युवा सदस्यों व नरसिंहपुर के साथियों की मौजूदगी में में ज्ञापन सौपा
ज्ञापन की प्रतियां गृहमंत्री मप्र शासन भोपाल, पुलिस महानिदेशक मप्र शासन भोपाल, पुलिस महानिरीक्षक जबलपुर संभाग जबलपुर को भी प्रेषित की गई
करेली (News Life)। नवलगांव में हुए हत्याकांड के संदर्भ में अज्ञात आरोपियों के नाम दर्ज मामले में आनन फानन में बिना उचित जांच के निजी चैनल के संवाददाता पर हत्या के मुकदमे की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग के संदर्भ में 6 तथ्यात्मक बिन्दुओं पर पुलिस अधीक्षक अमित कुमार को प्रेस परिषद करेली के अध्यक्ष अनुज ममार ने प्रेस परिषद के वरिष्ठ व युवा सदस्यों व नरसिंहपुर के साथियों की मौजूदगी में कार्यालय पुलिस अधीक्षक में ज्ञापन सौपा। एसपी ने ज्ञापन के सभी बिन्दुओं पर ध्यान देते हुए कहा कि अन्याय नहीं होगा उन्हौनें कुछ पाइंट नोट भी किए मामले पर विस्तृत चर्चा की गई। अनेक तथ्यों से परिषद सदस्यों ने अवगत भी कराया। ज्ञापन में उल्लेखित किया कि विगत दिनों स्टेशन गंज थाना अंतर्गत नवलगांव में एक व्यक्ति की मारपीट से मौत हो गई थी, प्रेस परिषद उक्त घटना की निंदा करती है जिसने भी इस घटना को अंजाम दिया है उसे सजा जरूर मिलना चाहिए लेकिन कुछ तथ्य सामने आ रहे है जिससे साफ जाहिर होता है कि आयोजन में शामिल पत्रकार को टारगेट करके हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। उक्त मामले में करेली निवासी आईबीसी 24 के अधिकृत जिला संवाददाता सिद्धार्थ ब्रजपुरिया पर आनन फानन में हत्या का मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया है।

तथ्य यह है कि- मारपीट की घटना 2 जून की है, पीड़ित पक्ष की तरफ से 2 दिन तक उसका इलाज क्यों नही करवाया गया..? जानकारी के अनुसार मृतक की पसली टूटी हुई थी, इन दो दिनों में मृतक के साथ किसी और ने तो मार पीट नही की थी…? परिजनों ने इलाज में देर क्यो की..? एफआईआर के अनुसार मारपीट में किसी हथियार से मारपीट का उल्लेख नही है, अर्थात हाथ-पैर से ही मारपीट की गई है. क्या मारपीट का आशय हत्या करना था या मारपीट में आई चोट की वजह से मृत्यु हुई है.? यदि आशय हत्या करना नही था तो क्या गैर इरादतन हत्या की धारा लगाने की जगह सीधे हत्या की धारा लगाकर विवेचना न्यायोचित है..? एफ आई आर में 5-6 अज्ञात व्यक्तियों का उल्लेख है..नवलगांव से लगभग 25 किमी दूर करेली निवासी पत्रकार की पहचान जिस आधार पर की गई उसी आधार पर घटना के लगभग 15 दिन बाद भी अन्य आरोपियों को पहचान क्यों नही की जा सकी है..? प्राप्त जानकारी के अनुसार आयोजन स्थल पर तैयारियों में जुटे आयोजक एडवोकेट अजय लोधी, टेंट संचालक, उनके कर्मचारियों ने आयोजन स्थल के पास ऐसी किसी भी घटना के होने से साफ इंकार किया गया है..इससे स्पष्ट है कि घटना स्थल जो बताया गया है..घटना वहां से कहीं दूर हुई है..तब यह भी संभव है आरोपी पत्रकार ने मारपीट न की हो घटना 2 जून 2024 दोपहर की बताई जा रही है उसके बाद पीड़ित की 4 जून में मौत हो जाती है, पुलिस द्वारा एफ आई आर दर्ज कर ली जाती है उसके बाद भी सिद्धार्थ कथा स्थल में अपनी सेवा देता रहा और उच्च अधिकारियों से मिलता जुलता रहा, यदि वह शामिल था तो क्या किसी जघन्य अपराध में शामिल आरोपी का सामान्य बर्ताव ऐसा हो सकता है..? यहां उल्लेखनीय है कि सिद्धार्थ ब्रजपुरिया करेली नगर के सभ्रांत एवं व्यापारिक परिवार से हैं जिसका कोई भी आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है शिक्षित और पत्रकारिता से स्नातक है और पीड़ित पक्ष ने भी मारपीट में सिद्धार्थ के नाम का उल्लेख नहीं किया। पत्रकार सिद्धार्थ बृजपुरिया को कथा के समापन के अगले दिन 11 जून को दोपहर को करेली से गिरफ्तार कर लिया और 12 तारीख को जेल भेज दिया, जबकि घटना में अन्य पांच छह लोग और शामिल होने की बात पुलिस कर रही है लेकिन अन्य लोगो को अभी तक गिरफ्तार नही किया गया, ना ही अन्य व्यक्तियों के नाम सामने आए, सिद्धार्थ की गिरफ्तारी में असामान्य तेजी और अन्य आरोपियों के मामले में पुलिस की असामान्य सुस्ती, पुलिस की कार्यप्रणाली को संदेह के घेरे में ला रही है, प्र्रेस परिषद करेली की मांग है कि पत्रकार से जुड़े मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच की जाए और आरोपियों पर मामला दर्ज किया जाए। यदि इस प्रकरण में कोई ग़ैर वाजिब दबाब पुलिस पर डाला जा रहा है तो वह दबाब उजागर किया जाए। आपसे सादर विनय अपेक्षा है कि पुलिस किसी तरह के दबाब में कोई कार्यवाही नहीं करेंगी। अतः मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच जरूरी है कृपया अपनी कार्यवाही से प्रेस परिषद को अवगत कराया जावे ज्ञापन की प्रतियां गृहमंत्री मप्र शासन भोपाल, पुलिस महानिदेशक मप्र शासन भोपाल पुलिस महानिरीक्षक जबलपुर संभाग जबलपुर को भी प्रेषित की गई है।
(पत्रकार बी डी सोनी की स्पेशल रिपोर्ट)








