नरसिंहपुर (राजकुमार दुबे)। आए दिन सुनने व देखने में आता रहता है कि पुलिस अधिकारियों – कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया। पर विवेचना में यदि प्रशिक्षण की सीख काम नहीं आई और किसी को लापरवाही का परिणाम भुगतना पड़े, तो फिर ऐसी व्यवस्थाओं का क्या मतलब? ऐसी ही लापरवाहीपूर्ण विवेचना से एक नाबालिक बालक को कई दिन केंद्रीय जेल में बिताना पड़े। इसे दुरावस्था ही कहेंगे कि उसके माता-पिता आवाज उठाते रहे कि उनका बालक नाबालिक है, पर कोई सुनने तैयार नहीं हुआ।वैधानिक प्रक्रिया भी इतनी लंबी रही की बालक को कई दिन केंद्रीय जेल में बिताना पड़े।
ये है मामला – पुलिस थाना स्टेशनगंज नरसिंहपुर द्वारा अपराध कमांक – 453/2024 अंतर्गत धारा 363, 366, 376, 376 (2) एन. एवं धारा 3, 45 (एल.)/6 पॉक्सो एक्ट एवं धारा 3 (1) डब्ल्यू. आई. 3 (2) व्हीए. एससी-एसटी. एक्ट में अपचारी बालक निवासी करेली बस्ती अंबेडकर वार्ड करेली जिला नरसिंहपुर म.प्र. को पुलिस द्वारा वयस्क मानते हुए 10 जून को विशेष न्यायाधीश महोदय (पॉक्सो) के समक्ष पेश किया जहां से उसे न्यायायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया।
अभिभावक ने न्यायालय में उठवाई आवाज
विशेष न्यायाधीश के समक्ष अपचारी बालक की ओर से उसके अभिभावक ने अधिवक्ता सुधेश वैद्य व शशांक रघुवंशी के माध्यम से दाखिल खारिज शासकीय माध्यमिक बालक शाला करेली बस्ती का बुलाये जाने का आवेदन प्रस्तुत किया। न्यायालय द्वारा स्कूल का दाखिल खारिज रजिस्टर एवं स्कूल शिक्षिका सहित पुलिस थाना स्टेशनगंज को आदेशित कर बुलाया गया। जहां पर अपचारी बालक होना पाया गया। प्रकरण को स्थानांतरित कर किशोर न्याय बोर्ड नरसिंहपुर के समक्ष पेश किया जहां से आज दिनांक को अपचारी बालक को उसके अभिभावक के सुपुर्द किया गया है।








