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एनएसयूआई ने 6 सूत्रीय मांगों को लेकर कुलगुरू को सौंपा ज्ञापन

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविधालयों द्वारा एफआरसी से अधिक फीस वसूलने, कोड 28 के तहत प्राध्यापकों को नियुक्ति न किए जाने एवं संबद्धता के मापदंड पूरे किए बगैर शपथ पत्र में झूठे तथ्यों के आधार पर संबद्धता हासिल करने सहित विश्विद्यालय में व्याप्त अनिमित्ताओ को लेकर एनएसयूआई द्वारा दिया गया ज्ञापन

जबलपुर (News Life)। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन एनएसयूआई द्वारा एनएसयूआई पूर्व जिला अध्यक्ष सागर शुक्ला के नेतृत्व में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविधालयों द्वारा एफआरसी से अधिक फीस वसूलने, कोड 28 के तहत प्राध्यापकों को नियुक्ति न किए जाने, संबद्धता के मापदंड पूरे किए बगैर शपथ पत्र में झूठे तथ्यों के आधार पर संबद्धता हासिल करने, विश्विद्यालय में मूल्यांकन कार्य में लापरवाही, छात्रों की शिकायत के निवारण हेतू एकीकृत शिकायत खिड़की सहित शोध प्रबंध हेतु आधुनिक लैब, कम्प्यूटर सेंटर आदि मांगों को लेकर कुलगुरु डॉ. राजेश कुमार वर्मा, कुलसचिव डॉ. दीपेश मिश्रा, डीएसडब्ल्यू डॉ. विवेक मिश्रा को संयुक्त रूप से ज्ञापन सौंपा।

एनएसयूआई के पूर्व जिला अध्यक्ष सागर शुक्ला ने बताया की विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी अशासकीय और अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों मे संचालित किए जा रहे पाठ्यक्रमों मे फीस की भारी असंगति है। अनेकों महाविद्यालयों को पाठ्यक्रम शुल्क के निर्धारण हेतू एफआरसी से अनुमोदन अप्राप्त है, अर्थात महाविद्यालयों द्वारा अवैध रूप से तथ्य छिपाकर वसूली की जा रही है, ऐसे महाविद्यालयों की जांच कराने एवं जहां आवश्यक हो वहा उचित समिति से पाठ्यकर्म शुल्क के निर्धारण की समान व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

महाविद्यालयों मे कार्यरत प्राध्यापकों की नियुक्ति मे यूजीसी के मापदंडों का खुला उल्लघंन किया जा रहा है। दूसरी ओर कोड 28 के तहत महज़ कुछ ही महाविधालय में प्राध्यापक की नियुक्ति की गई है अधिकांश संस्थानों मे कोड 28 की कार्यवाही लंबित है। प्राध्यापकों की शैक्षिक गुणवत्ता छात्रों पर सीधा प्रभाव डालती है, और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध हो इसकी समुचित जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की है।

पूर्व मे अनेकों बार देखने मे आया है कि महाविद्यालयों द्वारा शपथ पत्र मे अनुचित जानकारी प्रदर्शित कर संबद्धता हासिल कर ली गई। विश्वविद्यालय भी संबद्धता जारी करने के पश्चात शपथ पत्र में उल्लेखित तथ्यों का सत्यापन सुनिश्चित नहीं करता और संसाधनों के अभाव मे ही ऐसे महाविद्यालय छात्रों से मोटी रकम वसूलते है और उनके भविष्य से खिलवाड़ करते है। संगठन मांग करता है की विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकार मे आने वाले महाविद्यालयों की जांच सुनिश्चित की जाए। एवं न्यायोचित कार्यवाही की व्यवस्था की जाए।

विश्वविद्यालय मे अधोसंरचना के कार्य जैसे आधुनिक कंप्यूटर लैब, आधुनिक शोध केंद्र, अत्याधुनिक सभागार आदि की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। छात्रों को इन सबके अभाव के कारण ही प्रदेश के दूसरे विश्वविद्यालयों का रुख करना पड़ता है।

विश्वविद्यालय मे छात्रों के लिए आधुनिक सुविधाओं से संपन्न एक एकीकृत छात्र समस्या निवारण खिड़की की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। पूर्व मे कई बार शिकायत प्राप्त हुई है कि छात्रों से दलालों द्वारा रुपयों की मांग की गई है। अतः विश्वविद्यालय परिसर मे एकीकृत छात्र समस्या निवारण खिड़की की स्थापन की जाए।

विश्वविद्यालय द्वारा जारी किए जाने वाले परिक्षा परिणाम मे अनेकों बार विसंगतियां पाई गई है। इन विसंगतियों के कारण कई बार छात्रों का परीक्षा परिणाम खराब रहा है। शिक्षक भी मूल्यांकन कार्य में घोर लापरवाही की जाती है विश्वविद्यालय की परीक्षा मूल्यांकन पद्धति मे रचनात्मक सुधार करते हुए मूल्यांकन की व्यवस्था विश्वविद्यालय केंद्रीकृत रूप से कराई जाए।

ज्ञापन में मुख्य रूप से पूर्व जिला अध्यक्ष सागर शुक्ला, अदनान अंसारी प्रतीक गौतम, एजाज अंसारी, सक्षम यादव, सचिन, अंकित कोरी, अंकित शुक्ला, चिंटू ठाकुर, सैफ अली, अंकुश गौतम, अभिषेक श्रीवास्तव, सोनू मराठी, सुशांत विश्वकर्मा आदि उपस्थित रहे।

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