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गूंजा हर-हर गंगे हर-हर नर्मदे का उद्घोष, गंगा दशहरा पर लगी श्रद्धा की डुबकी

जबलपुर। गंगा दशहरा के पावन पर्व के अवसर पर पुण्य सलिला माँ नर्मदा के विभिन्न तटों पर कल सुबह से ही नर्मदा स्नान करने वालों की भीड़ लगी रही और शाम को महाआरती के वक्त भारी जनसैलाब यहां उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं ने हर-हर गंगे हर हर नर्मदे के उद्घोष के साथ नर्मदा नदी के पावन तटों पर श्रद्धा व आस्था की डुबकी लगाई।
गंगा दशहरे का भले ही गंगा के तटों में मुख्य रुप से बनाया जाता है लेकिन नर्मदा तट पर भी पूरी श्रद्धा के साथ गंगा दशहरे का पर्व मनाया जाने लगा है। इस दिन श्रद्धालु माँ नर्मदा में गंगा जल अर्पण कर माँ गंगा का आव्हान करते हैं और स्नान ध्यान कर मां नर्मदा का पूजन अर्चन करते हैं इस बात का पुराणों में भी उल्लेख है कि पुण्य सलिला गंगा के स्नान से जो पुण्य मिलता है वही पुण्य माँ नर्मदा के दर्शन मात्र से भी प्राप्त होता है। यही वजह है कि गंगा दशहरे के पर्व पर नर्मदा तटों पर लोग गंगाजल लेकर पहुंचे और जल अर्पित कर माँ गंगा का आव्हान किया और पूजन-अर्चना की।
ऐसी मान्यता है कि गंगा मैया लोगों के पाप धोते-धोते थक गयी तब माँ नर्मदा जी ने गंगा को आर्शीवाद दिया कि तुम साल में एक बार हमसे मिलकर पूरे पाप धो सकती हो और तभी से साल में एक बार गंगा दशहरा पर गंगा मैया नर्मदा से मिलने आती है।
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को श्रीगंगा दशहरा मनाया जाता है इस दिन मां गंगा शिव लोक से भगवान शिव की जटाओं से पृथ्वी पर पहुंची थीं, इसलिए इस दिन को श्रीगंगा दशहरा के रूप में जाना जाता है। धर्मग्रंथों के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन हस्त नक्षत्र में मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर आई थीं,
धर्मग्रंथों के अनुसार ऋषि भागीरथ के पूर्वजों की अस्थियों को विसर्जित करने के लिए उन्हें बहते हुए निर्मल जल की आवश्यकता थी। जिसके लिए उन्होंने माँ गंगा की कड़ी तपस्या की जिससे माँ गंगा पृथ्वी पर अवतरित हो सके। श्रीगंगा जी ने प्रसन्न होकर धरती पर अवतरित होने की बात मान ली, लेकिन उनका वेग इतना तीव्र था कि धरती पर आने से प्रलय आ सकता था,तब भागीरथ ने एक बार फिर तपस्या कर भगवान शिव शंकर जी से मदद की गुहार लगाई,भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं से होकर धरती पर जाने के लिए कहा ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन श्रीगंगा जी पृथ्वी पर अवतरित हुई तब से वह दिन श्रीगंगा दशहरा के नाम से जाना जाता है। माना जाता है माँ गंगा अपने साथ पृथ्वी पर संपन्नता और शुद्धता लेकर आई थी। तब से आज तक गंगा पृथ्वी पर मौजूद है। जिनका प्रवाह आज भी शिव जी की जटाओं से ही हो रहा है।
श्रीगंगा दशहरा के दिन जो भी व्यक्ति पानी में श्रीगंगा जल मिलाकर गंगा मंत्र का दस बार जाप करते हुए स्नान करता है, चाहे वो दरिद्र हो, असमर्थ हो वह भी गंगा की पूजा कर पूर्ण फल प्राप्त हो जाता है।

Deepu Choubey

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