newslifeindia

जिस सेना ने पूरे परिवार को तबाह किया उसी का समर्थन कर रहे बिलावल

पाकिस्तान की राजनीति में सेना की भूमिका हमेशा भारत-विरोधी रही है
नई दिल्ली। पाकिस्तान के पीपीपी नेता बिलावल भुट्टो जरदारी एक बार फिर भारतीय सियासी गलियारों में चर्चा में हैं। इस बार उन पर भारत के वरिष्ठ कांग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा ने निशाना साधा है, जिन्होंने पाकिस्तान की सेना के प्रति बिलावल के रुख पर सवाल उठाए हैं। देवड़ा ने कहा कि ‘ये कितना हैरान करने वाला है कि बिलावल भुट्टो आज उसी पाकिस्तानी सेना का समर्थन कर रहे हैं, जिसने उनके पूरे परिवार को तबाह कर दिया। उनके दादा जुल्फिकार अली भुट्टो को सेना ने फांसी दी, उनकी मां बेनजीर भुट्टो की हत्या सेना समर्थित आतंकवादियों ने की और उनके दो मामाओं की रहस्यमय परिस्थितियों में हत्या हुई, जिसके पीछे भी सेना-आतंकवादी गठजोड़ को ही जिम्मेदार माना जाता है। फिर भी बिलावल उन्हीं का साथ दे रहे हैं।
देवड़ा का यह बयान सीधे पाकिस्तान की सत्ता संरचना पर सवाल खड़ा करता है, वह भी जब पाकिस्तान में सेना का दखल सियासत से लेकर मीडिया तक हर क्षेत्र में लगातार बढ़ता जा रहा है। बिलावल जो खुद एक नेता हैं, कई बार सेना के खिलाफ बयान दे चुके हैं, लेकिन हाल के महीनों में उनके सुर बदले नजर आ रहे हैं। वे अब पाक सेना के साथ राजनीतिक तालमेल की कोशिश करते दिख रहे हैं। देवड़ा का तंज इसी पृष्ठभूमि में आया है।
भारत में यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि पाकिस्तान की राजनीति में सेना की भूमिका हमेशा भारत-विरोधी नीतियों से जुड़ी है। देवड़ा ने इस मुद्दे को केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे ‘स्मृति और नैतिकता की हार’ बताया है। देवड़ा का इशारा साफ था कि सत्ता और सियासी लाभ के लिए कोई भी व्यक्ति अपने पारिवारिक इतिहास और सिद्धांतों को भूल सकता है? बिलावल के इस रुख पर पाकिस्तानी मीडिया और विश्लेषकों की प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन भारत में ये चर्चा जरूर हो रही है कि क्या पाकिस्तान का युवा नेतृत्व भी अब सेना की छाया से कभी बाहर निकल पाएगा?

Deepu Choubey

Share this post:

खबरें और भी हैं...

लाइव क्रिकट स्कोर

Digital marketing for news publishersHUF Registration Services In India

कोरोना अपडेट

Weather Data Source: Wetter Indien 7 tage

राशिफल