प्रदेश संगठन में फिलहाल सामान्य वर्ग से प्रदेश अध्यक्ष, ओबीसी से मुख्यमंत्री और अनुसूचित जाति वर्ग से उपमुख्यमंत्री हैं। ऐसे में संगठन संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी आदिवासी या महिला नेता को सौंपे जाने की संभावना है। अंतिम निर्णय पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व लेगा।
प्रदेश परिषद के 345 सदस्य करेंगे चयन
प्रदेश अध्यक्ष के चयन के लिए भाजपा द्वारा पहले ही जिला अध्यक्षों के साथ प्रदेश परिषद के 345 सदस्य चुन लिए गए हैं। दो विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर एक क्लस्टर बनाया गया है, जिसके तहत परिषद सदस्य चुने गए हैं। आरक्षित वर्गों (एससी-एसटी) के लिए सीटों के अनुरूप संबंधित वर्ग से ही परिषद सदस्य बनाए गए हैं। महिलाओं और ओबीसी वर्ग को भी समुचित प्रतिनिधित्व दिया गया है। मध्यप्रदेश भाजपा में अधिकांश बार प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव सर्वसम्मति से हुआ है। केवल दो बार ही मतदान की स्थिति बनी थी। पहली बार 1990 के दशक में लखीराम अग्रवाल और कैलाश जोशी के बीच, और दूसरी बार वर्ष 2000 में शिवराज सिंह चौहान और विक्रम वर्मा के बीच, जिसमें वर्मा विजयी हुए थे।
आधा दर्जन से अधिक दावेदार सक्रिय
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए वर्तमान अध्यक्ष वीडी शर्मा स्वयं बड़े दावेदार हैं। इसके साथ पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला, बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल और पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया के साथ सांसद सुधीर गुप्ता के नाम भी इस दौड़ में बने हुए हैं। महिला अध्यक्ष बनाए जाने की स्थिति में पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस, सांसद कविता पाटीदार, लता वानखेड़े के नाम चर्चाओं में हैं। अगर भाजपा बाबा साहब अंबेडकर को देखकर अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति वर्ग से बनाती है तो भाजपा अजा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य, विधायक प्रदीप लारिया के नाम भी चर्चा में हैं। भाजपा द्रौपदी मुर्मु को राष्ट्रपति बनाकर हर चुनाव में आदिवासियों को सम्मान देने की बात करती है। भाजपा मध्यप्रदेश में आदिवासियों में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए बैतूल से सांसद केंद्रीय मंत्री दुर्गादास उइके, खरगोन सांसद गजेन्द्र पटेल, मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी के नाम पर विचार कर रही है। महिला वर्ग को भी साधने के लिए सावित्री ठाकुर को भी मौका दिया जा सकता है।







