हिंदी साहित्य में अनुवाद की दुनिया में अब तक की सबसे बड़ी नकद राशि का पुरस्कार उर्दू के मशहूर लेखक मोहसिन खान को मिला है. उनके उपन्यास ‘अल्लाह मियां का कारखाना’ के हिंदी अनुवाद को इस सम्मान के लिए चुना गया.
रेख़्ता पब्लिकेशंस और राजकमल प्रकाशन के सह-प्रकाशन में प्रकाशित यह किताब एक बच्चे के दृष्टिकोण से इस दुनिया को देखने-दिखाने की कोशिश करती है. पाठकों को उपन्यास के मुख्य पात्र 9 साल के जिब्रान के माध्यम से बाल-मन में उठने वाली कई सहज-सुलभ जिज्ञासाओं के बारे में जानने को मिलता है. कई बार उसके मन में उठने वाले सवाल और उसके जीवन में होने वाली घटनाएं पाठक की भावनाओं को उद्वेलित करती हैं और पढ़ने वाले उस छोटे से लड़के से जुड़-से जाते हैं. मूल उपन्यास उर्दू भाषा में प्रसिद्ध लेखक मोहसिन खान द्वारा लिखा गया है जिसे हिंदी में सईद अहमद ने अनुवाद किया है.
एक सरकारी बैंक द्वारा आयोजित ‘राष्ट्रभाषा सम्मान’ के तहत ‘अल्लाह मियां का कारखाना’ को यह सम्मान प्रदान किया गया. पहले राष्ट्रभाषा सम्मान पुरस्कार में उर्दू में लिखी किताबों का बोलबाला रहा. पुरस्कार के लिए इस साल नामित छह किताबों में से तीन किताबें उर्दू भाषा की थीं जिनमें ‘अल्लाह मियां का कारखाना’ के अतिरिक्त ‘चीनी कोठी’ और ‘नेमत-ख़ाना’ सम्मिलित हैं.

पांच सदस्यों के एक निर्णायक मण्डल ने इस पुरस्कार के लिए विजेता किताब का चयन किया. निर्णायक मंडल की अध्यक्षता ‘बुकर पुरस्कार’ से सम्मानित लेखिका गीतांजलि श्री ने की. निर्णायक मण्डल में वरिष्ठ कवि अरुण कमल, शैक्षिक एवं खाद्य समीक्षक पुष्पेश पन्त, चर्चित कवयित्री अनामिका और साहित्यकार तथा अनुवादक प्रभात रंजन सम्मिलित थे.
सबसे बड़ा पुरस्कार
राष्ट्रभाषा सम्मान मूल कृति के लेखक और हिंदी में पुस्तक के अनुवादक, दोनों को प्रदान किया जाता है. पुरस्कार विजेता पुस्तक के मूल कृति के लेखक को 21 लाख रुपए और और उस पुस्तक के हिंदी अनुवादक को 15 लाख रुपए प्रदान किए जाते हैं. इसके अलावा, अगली पांच चयनित पुस्तकों के लेखकों और हिंदी अनुवादकों को 3 लाख रुपए और 2 लाख रुपए प्रदान किए जाते हैं.
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FIRST PUBLISHED : June 12, 2023, 18:57 IST








