
नकुल कुमार/पूर्वी चम्पारण: एमबीए चायवाला के नाम से मशहूर प्रफुल्ल बिल्लोरी पूर्वी चंपारण के मुख्यालय में अंशुमान सिंह के एमबीए चायवाला मोतिहारी (MBA CHAIWALA MOTIHARI) के उद्घाटन के मौके पर पहुंचे थे. इस दौरान वे मोतिहारी के युवाओं से मुखातिब भी हुए. वहीं उनसे मिलने के लिए युवा काफी उत्साहित दिखे. उन्होंने एक स्टेज परफॉर्मेंस के माध्यम से युवाओं को प्रोत्साहित भी किया. इस दौरान उन्होंने लोकल 18 से खास बातचीत की.
चंपारण में देर से आए लेकिन दुरुस्त आए
एमबीए चायवाला के नाम से मशहूर प्रफुल्ल बिल्लोरी पहली बार चंपारण आने पर बताया कि काफी समय से कोशिश कर रहा था. पटना तक की यात्रा की थी, लेकिन चंपारण तक की यात्रा पहली बार की है. वहीं उन्होंने बताया कि उनका सौभाग्य है कि चंपारण की धरती पर पहली बार आया. भले ही देर आए पर दुरुस्त आए.
प्रफुल्ल ने बताया कि एमबीए पढ़ाई के दौरान काफी संघर्ष किया, लेकिन उनका सिलेक्शन नहीं हो पाया, फिर 2017 में अहमदाबाद में चाय का ठेला लगाना शुरू किया. तीन साल तक सड़कों पर चाय का ठेला लगाकर काफी मेहनत किया. उसी का परिणाम है कि आज पूरे भारत में 100 से ज्यादा आउटलेट्स है. इसे साथ चाय पत्ती का भी व्यापार है.
संघर्ष कर जीवन की यात्रा को कर सकते हैं लंबी
जीवन में सफलता की कठिनाइयों पर प्रकाश डालते हुए प्रफुल्ल बिल्लोरी बताया कि जीवन की यात्रा काफी लंबी है, संघर्ष में रहना पड़ेगा. इसी में सब कुछ करना होता है एवं अपने मुकाम को प्राप्त करने में चार पांच साल का समय तो लगते हैं. मैने वह समय बिताया एवं आज लोगों के साथ काम करके मजा आ रहा है.पहले रोजगार के पीछे भागते थे अब रोजगार दे रहे हैं. उन्होंने बताया कि किस तरह से पहले रोजगार के पीछे भागते थे एवं अभी हजारों लोगों को रोजगार दे रहे हैं. वहीं लाखों-करोड़ों लोगों को प्रेरित भी कर रहे हैं.
लोगों को मानसिकता बदलने की है जरूरत
इतना ज्यादा इन्वेस्टमेंट करके चाय का दुकान ही क्यों वाले सवाल को सुनते ही प्रफुल्ल एकदम से इरिटेट हो जाते हैं एवं बिफरते हुए कहते हैं कि यह चाय की दुकान नहीं है. जब बड़ा पराठा का दुकान खोलते हैं तो आप उसे पिज्जा बोलते हो तो उसमें बड़ा ब्रांड आ जाता है. जब बड़ा समोसा का दुकान खोलते हो तो वह जॉइंट समोसा हो जाता है, मैकडॉनल्ड्स, बर्गर किंग आदि बोलते हैं. कोई कॉफ़ी का शॉप खोल दे तो उसे स्टारबक्स बोलते हैं और जब एमबीए चायवाला खोल दे तो उसे लोग टफरी क्यों बोलते हैं. इसके लिए मानसिकता बदलने की जरूरत है. कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता है.
लोकल बिजनेस को करना पड़ेगा सपोर्ट
प्रफुल्ल बिल्लोरी ने बताया कि हमें अपने लोकल बिजनेस एवं ब्रांड को सपोर्ट करना पड़ेगा. हमें खुद को सिर्फ चाय के बिजनेस तक लिमिट नहीं करना है बल्कि जितनी भी चीज हम यूज करते हैं, चाहे वह शर्ट के बटन हो या अंडर गारमेंट सबका व्यापार है. हमने अपने चाय के बिजनेस को छोटे से शहर से शुरू किया था, लेकिन आज पूरे देश में आउटलेट्स हैं. इच्छा है कि सिर्फ एक एमबीए चायवाला नहीं बल्कि हजारों लोग एमबीए चायवाला बने. हजारों लोग रोजगार देने वाला बने न कि रोजगार के पीछे भागे.
एमबीए चायवाला के मैन्यू में 150 से ज्यादा है आइटम
प्रफुल्ल ने बताया कि उनके एमबीए चायवाला के मैन्यू में 150 से ज्यादा आइटम होते हैं. शहर के अनुसार कहीं पचास है तो कहीं 60 है. वही चाय भी 25 तरीके की होती हैं. उन्होंने बताया कि चंपारण का इतिहास काफी स्वर्णिम रहा है, यहां से बहुत सारी ऐतिहासिक चीजें निकली हैं. आप भी अपना इतिहास बनाइए. अतीत के नींव पर भविष्य का निर्माण कीजिए.
जो पुरानी पीढ़ियों ने किया उसके लिए उन्हें धन्यवाद कीजिए एवं वर्तमान में भी कुछ कीजिए, ताकि आपके भविष्य का निर्माण हो. वहीं उन्होंने बताया कि आज नहीं तो कल आपको मेहनत करनी पड़ेगी. खुशी से कर लो नहीं तो फिर मजबूरी में करनी पड़ेगी. मजबूरी में करनी पड़ेगी तो उसका दुःख ज्यादा होगा. खुशी से अपना संघर्ष चुनेंगे तो ज्यादा अच्छा लगेगा.
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FIRST PUBLISHED : June 13, 2023, 16:29 IST








