– ओंकार तिवारी एवं बाबूराव परांजपे को लेकर वयौवृद्ध भाजपा नेता ने व्यक्त की अभिव्यक्ति.
– पुराने कार्यकर्ताओं एवं नेताओं के परिजनों को लेकर हुए चिंतित.
जबलपुर/न्यूज लाइफ। भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के पहले और स्थापित होने के बाद संपूर्ण जीवन पार्टी हित में न्योछावर करने वाले एक शीर्ष और वृद्ध भाजपा नेता ने स्वयं को और परलोक सिधार चुके अपने साथी जनप्रतिनिधियों को याद करते हुए न्यूज़ लाइफ प्रतिनिधि से बात की और अश्रुपूरित मन से यह अभिव्यक्ति व्यक्त की, कि उनके साथियों द्वारा वर्षों पहले की गई मेहनत अब रंग ले आई है। उस दौरान बड़ा संघर्ष देखा और केवल धरने, प्रदर्शनों के दौरान लाठियां ही खाई। आज का दौर भाजपा मय हो गया है जिसे देखकर आज बड़ी खुशी होती है, लेकिन कहीं न कहीं मन में एक कमी सी खलती है की उस दौरान जो भी साथी नेता या साथी जनप्रतिनिधि ने विपरीत दौर को देखा और सामना किया भले ही वह आज इस दुनिया में नहीं, लेकिन कहीं न कहीं उनके परिजनों और कार्यकर्ताओं को अनदेखा किया जा रहा है। बड़े ही उदार मन से उन्होंने अपनी बातें रखी और 70 की दशक का जीवंत चित्रण अपनी बातों के माध्यम से दिखाया।
भाजपा के बूढ़े हो चुके वरिष्ठ नेताओं में स्थापित रहे एक जनप्रतिनिधि ने बात के दौरान बताया कि भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक नेताओं में शुमार स्व. बाबूराव पराजपे, संगठन महामंत्री विनय सहस्त्रबुद्धे, राज्यपाल निर्मल चंद्र जैन, वरिष्ठ भाजपा नेता अंबिकेश्वर दुबे, भगवतीधर् बाजपेई, प्रो. दीनानाथ मिश्रा, त्रिवेणी प्रसाद, पुरुषोत्तम संधि, ईश्वर दास रोहणी, डॉ. घूमर, डॉ. नेल्सन, छोटेलाल कोस्टा, लालजी साहू, चिंतामणि साहू, भूपेंद्र दुबे ऐसे अनेक वरिष्ठ नेताओं ने पं. ओंकार महाराज के साथ भाजपा को स्थापित कर शीर्ष स्तर पर पहुंचाया। सभी नेता एक दूसरे का आदर व सम्मान सार्वजनिक तौर पर करते थे। सभी नेताओं ने कठिन परिश्रम करके भाजपा की वरिष्ठ नेताओं को तैयार किया था, साथ ही पार्टी की द्वितीय कतार के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की फौज तैयार की थी, लेकिन अधिकांश नेताओं के निधन के बाद कुछ नेता ही साथ के शेष हैं, जिन्हें भी उचित प्रतिनिधित्व भाजपा से आज के वर्तमान दौर पर नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2000 के बाद महाराज के परिवार को अनदेखा किया गया। शहर का भाग्य या फिर दुर्भाग्य कहे की पंडित जी के निधन के 14 दिन बाद 27 सितंबर को दादा बाबूराव परांजपे भी स्वर्ग सिधार गए। इन सभी शीर्ष नेताओं में केवल रोहाणी जी के निधन के बाद उनके पुत्र को अवसर मिला, लेकिन आज तक अन्य वरिष्ठ नेताओं के परिवार एवं कार्यकर्ताओं को पार्टी में अनदेखा ही किया। बावजूद इसकी सभी स्वर्गीय वरिष्ठ नेताओं के परिवारजन एवं उनके साथी कार्यकर्ता पार्टी हित मैं कदम से कदम मिलाकर आज भी बिना किसी पद में रहते हुए साथ दे रहे हैं।
– दबंग, अलौकिक और विलक्षण प्रतिभा की धनी थे पं. ओंकार तिवारी…
भाजपा को स्थापित करने की दौड़ मैं शामिल रहे वरिष्ठ नेता ने अपना दर्द बयान करते हुए बताया कि सन 1998 में चुनाव जीतने के बाद जब ओंकार महाराज का स्वास्थ्य बिगड़ा, तो उस वक्त दिग्विजय सरकार सत्ता में आसीन थे। बताया गया कि महाराज के संबंध सभी से मधुर एवं गहरे थे। महाराज उस वक्त कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित थे और उनके सामने लिवर ट्रांसप्लांट करने की सलाह चिकित्सकों ने दी थी। वह एक ऐसा दौर था, जब हमारे देश में यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी और शिकागो में ही लिवर ट्रांसप्लांट किया जाता था। महाराज को इलाज के लिए शिकागो भेजा व पूरा खर्च भी तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार ने किया। 4 महीने शिकागो में इलाज तो चला, लेकिन लिवर ट्रांसप्लांट नहीं हो पाया। अत्यधिक समय अपने क्षेत्र की जनता से दूर रहने के बाद महाराज उनसे मिलने के लिए बड़े आतुर थे, इसलिए उन्होंने अपने वतन लौटने का फैसला लिया। जब वह अपने कार्यक्षेत्र पहुंचे तो क्षेत्रीय जनता ने जो उनका स्वागत किया था, वह आज भी मुझे सर्व विदित है, लेकिन मात्र 15 दिन रहने के बाद फिर पंडित जी का स्वास्थ्य एक बार फिर गंभीर हुआ और फिर से उन्हें स्टेट प्लेन से दिल्ली भेजा गया। दिल्ली से शिकागो जाने के बाद सप्ताह भर उनका इलाज चला, लेकिन स्थिति इतनी विपरीत हो चुकी थी कि चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर लिए और उन्हें वापस भेज दिया गया। अपने घर पहुंचने के बाद करीब सप्ताह भर उन्होंने जीवन मृत्यु से संघर्ष किया और फिर एक निजी अस्पताल में 12 सितंबर 1998 को भर्ती किया गया जहां देर रात उन्होंने दम तोड़ दिया।
– पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी शामिल हुए थे महाराज की अंत में यात्रा में…
बताया गया कि 13 सितंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी का लोकसभा प्रत्याशी जयश्री बनर्जी की सभा में आने के लिए आगमन होना था। जैसे ही वाजपेई जी डुमना विमानतल पर पहुंचे तो तत्कालीन नगर अध्यक्ष अनिल शर्मा ने उन्हें बताया, तो प्रधानमंत्री स्तब्ध रह गए। उन्होंने एसपीजी व पार्टी पदाधिकारी से कहा कि मैं महाराज को देखने जाऊंगा। आनन-फानन में एसपीजी के मना करने के बाद भी उन्होंने मिलने की इच्छा जाहिर की, जिसके चलते 2 घंटे के भीतर ही एसपीजी ने पूरा मोर्चा संभाला और दोपहर 2 बजे महाराज की गद्दी श्रद्धांजलि देने पहुंचे और परिजनों से भेंट की। उस वक्त सब कुछ अपनी आंखों से देखने वाले नेताजी ने दुखद मन से कहा कि पार्टी के साथ अपेक्षित रहते हुए भी आज तक प्रत्येक चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए महाराज की परिजन संघर्ष कर रहे हैं। आज पुनः 24 वर्षों बाद ओमकार परिवार की ओर से उत्तर मध्य विधानसभा, जो की महाराज की स्थापित की हुई सीट थी और वह वहां से चार बार विधायक और मंत्री रहते हुए जिस प्रकार से जनता का दल जीता है। 24 वर्ष बीतने के बाद भी आज जनता उन्हें याद कर रही है। उनकी पुष्पांजलि कार्यक्रम में आज भी सभी धर्म वर्ग के लोग उन्हें पुष्पांजलि देते हुए याद करते हैं। नेताजी ने बड़े गंभीर लहजे से व्यक्त करते हुए कहा कि इस परिवार से और उस कर्मभूमि से ही आज उनके पुत्र आलोक तिवारी को प्रत्याशी बनाए जाने की मांग कार्यकर्ताओं द्वारा की जा रही है।








